झारखंड के दारोगा के प्रमाणपत्र पर 32 साल तक बिहार में शिक्षक की नौकरी, बांका में फर्जी शिक्षक बर्खास्त
बांका: बिहार के बांका जिले में सरकारी नौकरी से जुड़ा एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। झारखंड में तैनात एक पुलिस सब इंस्पेक्टर के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों का कथित तौर पर इस्तेमाल कर एक व्यक्ति 32 साल तक सरकारी शिक्षक की नौकरी करता रहा। मामले का खुलासा होने के बाद शिक्षा विभाग ने आरोपी शिक्षक मनोज कुमार को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है। इस घटना ने शिक्षा विभाग की नियुक्ति और दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बांका: बिहार के बांका जिले में सरकारी नौकरी से जुड़ा एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। झारखंड में तैनात एक पुलिस सब इंस्पेक्टर के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों का कथित तौर पर इस्तेमाल कर एक व्यक्ति 32 साल तक सरकारी शिक्षक की नौकरी करता रहा। मामले का खुलासा होने के बाद शिक्षा विभाग ने आरोपी शिक्षक मनोज कुमार को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है। इस घटना ने शिक्षा विभाग की नियुक्ति और दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हमनाम दारोगा के प्रमाणपत्रों से नौकरी करने का आरोप
मामला बांका जिले के बाराहाट प्रखंड स्थित प्रोन्नत मध्य विद्यालय नगरी जानुकित्ता का है। यहां सहायक शिक्षक के पद पर कार्यरत मनोज कुमार पर रांची में पुलिस सब इंस्पेक्टर के पद पर तैनात अपने हमनाम मनोज कुमार के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों और पैन कार्ड का दुरुपयोग कर नौकरी हासिल करने का आरोप है।
पुलिस सब इंस्पेक्टर मनोज कुमार ने 2 अक्टूबर 2023 को देवघर जिले के मोहनपुर थाने में जालसाजी की प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उन्होंने शिकायत में आरोप लगाया था कि बांका में शिक्षक के पद पर कार्यरत व्यक्ति उनके शैक्षणिक दस्तावेजों का इस्तेमाल कर सरकारी नौकरी कर रहा है।
पुलिस जांच के बाद शिक्षा विभाग ने शुरू की कार्रवाई
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने 15 जनवरी 2025 को जिला शिक्षा पदाधिकारी को इसकी जानकारी दी। इसके बाद शिक्षा विभाग ने दोनों व्यक्तियों से शैक्षणिक प्रमाण पत्र और अन्य जरूरी दस्तावेज मांगे।
शिक्षक मनोज कुमार ने 24 फरवरी 2026 को अपने दस्तावेज जमा किए, जबकि झारखंड पुलिस में तैनात सब इंस्पेक्टर ने 15 अप्रैल 2026 को अपने मूल प्रमाण पत्र विभाग को उपलब्ध कराए।
जांच में नहीं मिले भर्ती परीक्षा के दस्तावेज
दस्तावेजों की जांच में सामने आया कि शिक्षक ने मैट्रिक और इंटर के डुप्लीकेट प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए थे। हालांकि, वर्ष 1994 की बीपीएससी शिक्षक भर्ती परीक्षा से संबंधित आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा सके।
जांच रिपोर्ट के आधार पर जिला शिक्षा पदाधिकारी ने बिहार सरकारी सेवक नियमावली, 2005 के तहत शिक्षक को बर्खास्त करने का आदेश जारी किया।
32 साल तक नौकरी कैसे चलती रही?
इस मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि कथित तौर पर फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर एक व्यक्ति तीन दशक से अधिक समय तक सरकारी सेवा में कैसे बना रहा और इतने वर्षों तक दस्तावेजों का सत्यापन क्यों नहीं हो पाया।
फिलहाल विभागीय जांच के आधार पर शिक्षक को बर्खास्त कर दिया गया है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और कथित फर्जीवाड़े से जुड़े अन्य पहलुओं पर भी नजर बनी हुई है।
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