JSSC CGL रद्द होने के बाद सफल अभ्यर्थियों ने दी आमरण अनशन की चेतावनी, बोले- ‘रातभर में सरकार कैसे छीन सकती है नौकरी?
RANCHI : JSSC CGL नियुक्ति रद्द किए जाने के बाद चयनित अभ्यर्थियों और कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है. राजधानी रांची में पिछले 24 घंटे से हो रही बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में कर्मचारी प्रोजेक्ट भवन के सामने डटे हुए हैं. कर्मचारियों का कहना है कि सरकार के फैसले से उनके सामने रोजगार और भविष्य का संकट खड़ा हो गया है. उनका दावा है कि उन्हें अब तक नियुक्ति रद्द किए जाने की लिखित सूचना तक नहीं दी गई है.
कर्मचारियों ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्होंने अपनी योग्यता और मेरिट के आधार पर नौकरी हासिल की थी. वर्षों तक संघर्ष करने के बाद उन्हें नियुक्ति मिली थी, लेकिन अब एक फैसले से उनकी नौकरी खत्म कर दी गई.
एक रात में कैसे छीन सकती है सरकार नौकरी?
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि JSSC CGL की प्रक्रिया का विज्ञापन वर्ष 2015 में निकला था. इसके बाद परीक्षा, विवाद और कानूनी लड़ाई का लंबा दौर चला. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार की ओर से नियुक्तियां दी गयीं. एक कर्मचारी ने कहा, “हमने अपनी मेरिट के दम पर नौकरी हासिल की थी. वर्षों तक संघर्ष किया. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार ने हमें नियुक्ति दी. अब अचानक एक रात में नौकरी छीन ली गई . सरकार ऐसा कैसे कर सकती है?”
नियुक्ति की शर्त का भी दिया हवाला
कर्मचारियों ने नियुक्ति के समय जारी आदेश की शर्तों का हवाला देते हुए कहा कि उस समय CID की SIT जांच रही थी. उनका कहना है कि नियुक्ति में यह स्पष्ट किया गया था कि जांच के दौरान यदि कोई अभ्यर्थी धांधली या अनियमितता में व्यक्तिगत रूप से दोषी पाया जाता है, तो उसकी नियुक्ति रद्द की जा सकती है.
कर्मचारियों का सवाल है कि यदि कुछ अभ्यर्थियों पर अनियमितता के आरोप हैं, तो कार्रवाई संबंधित अभ्यर्थियों पर होनी चाहिए थी. पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को ही रद्द क्यों किया गया?
एक व्यक्ति के लिए पूरी नियुक्ति प्रक्रिया रद्द कर दी
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि सरकार ने किसी एक मामले या कुछ अभ्यर्थियों से जुड़े विवाद के कारण करीब 2000 नियुक्त कर्मचारियों के भविष्य को प्रभावित कर दिया है. एक कर्मचारी ने कहा कि “अगर जांच में कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसकी नियुक्ति रद्द कीजिए. लेकिन पूरे बैच को ही खत्म कर देना कहां तक उचित है? हमें लगता है कि सरकार ने भीड़ के दबाव में यह फैसला लिया है.”
हालांकि, नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सरकार और संबंधित जांच एजेंसियों का अपना पक्ष है. कर्मचारियों का कहना है कि वे अब इस फैसले को अदालत में चुनौती देंगे.
कोर्ट पर अब भरोसा
प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि वे सरकार के फैसले के खिलाफ न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे. कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें अब न्यायपालिका से उम्मीद है कि उनकी नौकरी और भविष्य से जुड़े मामले पर निष्पक्ष फैसला होगा. उन्होंने कहा कि “सरकार के फैसले के खिलाफ हम कोर्ट जाएंगे. अब हमें माननीय न्यायालय पर भरोसा है.”
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने बताया कि JSSC CGL के जरिए नियुक्त होने वालों में बड़ी संख्या ऐसे अभ्यर्थियों की थी, जो पहले से कहीं न कहीं नौकरी कर रहे थे. किसी के पास केंद्र सरकार की नौकरी थी, कोई रेलवे में कार्यरत था तो कोई दूसरे राज्य की सरकारी नौकरी कर रहा था.
कर्मचारियों के अनुसार अपने होम स्टेट झारखंड लौटने और बेहतर अवसर की उम्मीद में कई लोगों ने पुरानी नौकरी तक छोड़ दी थी. कुछ अभ्यर्थियों के पास इससे पहले दो-दो या तीन-तीन नौकरियों का अनुभव भी था. उनका कहना है कि अब नियुक्ति रद्द होने के बाद ऐसे कर्मचारियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि वे वापस अपनी पुरानी नौकरी में कैसे जाएंगे.
लगभग 50 फीसदी कर्मचारी पहले से नौकरी में थे
कर्मचारियों का दावा है कि करीब 2000 नियुक्त अभ्यर्थियों में लगभग 50 फीसदी ऐसे थे, जो नियुक्ति से पहले कहीं न कहीं नौकरी कर रहे थे. JSSC CGL में चयन के बाद उन्होंने अपनी पुरानी नौकरी छोड़कर झारखंड सरकार की सेवा ज्वाइन की थी. अब नियुक्ति रद्द होने के बाद उन्हें दोहरी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है- नई नौकरी चली गयी और पुरानी नौकरी में वापस लौटने का रास्ता भी आसान नहीं है.
एक छात्रा की कहानी सुनकर रोंगटे खड़े हो जाएंगे
प्रदर्शन में शामिल एक महिला कर्मचारी ने अपनी कहानी बताते हुए कहा कि वह पढ़ाई में हमेशा से बेहतर रही. उसने जीवन में लगातार अच्छे अंक हासिल किए और सरकारी नौकरी की तैयारी में वर्षों लगाए. उसने कहा कि जब लंबे संघर्ष के बाद JSSC CGL के जरिए उसे नौकरी मिली, तो उसे लगा कि उसकी मेहनत सफल हो गई. लेकिन नियुक्ति रद्द होने के बाद अब उसके पास कोई नौकरी नहीं है.
कर्मचारियों का कहना है कि ऐसे कई अभ्यर्थी हैं, जिन्होंने इस नौकरी को पाने के लिए अपनी जिंदगी के कई साल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगा दिए.
सरकार की गलती की सजा हम क्यों भुगतें?
कर्मचारियों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर परीक्षा प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी हुई, तो उसकी सजा उन अभ्यर्थियों को क्यों दी जा रही है, जिन्होंने अपनी मेहनत और मेरिट के आधार पर परीक्षा पास की? एक प्रदर्शनकारी ने कहा, परीक्षा लेने की जिम्मेदारी सरकार की थी. अगर किसी स्तर पर धांधली हुई तो उसकी जिम्मेदारी सरकार की है. हम सरकार की गलती की सजा क्यों भुगतें?
बारिश के बीच आंदोलन जारी, आमरण अनशन की चेतावनी
राजधानी रांची में लगातार बारिश के बावजूद कर्मचारियों का प्रदर्शन जारी है. प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार अपना फैसला वापस नहीं लेती है, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा. कर्मचारियों ने कहा कि जरूरत पड़ने पर वे आमरण अनशन शुरू करेंगे. उनका कहना है कि जब तक नियुक्ति रद्द करने का फैसला वापस नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा.
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