त्रिगुण सिद्धांत से समझाया व्यक्तित्व का मनोवैज्ञानिक स्वरूप, मगध विश्वविद्यालय में विशेष अतिथि व्याख्यान का आयोजन, सत्त्व, रजस् और तमस् के मनोवैज्ञानिक आयामों पर हुई चर्चा
बोधगया। मगध विश्वविद्यालय, बोधगया के स्नातकोत्तर मनोविज्ञान विभाग की ओर से ‘भारतीय चिंतन में व्यक्तित्व का त्रिगुण सिद्धांत’ विषय पर विशेष अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं वक्ता के रूप में रांची विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. मीरा जायसवाल उपस्थित रहीं।
अपने व्याख्यान में प्रो. मीरा जायसवाल ने भारतीय चिंतन परंपरा में व्यक्तित्व की अवधारणा तथा सत्त्व, रजस् और तमस् तीनों गुणों के मनोवैज्ञानिक आयामों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि त्रिगुण सिद्धांत भारतीय दर्शन में मानव व्यक्तित्व, व्यवहार और मानसिक प्रवृत्तियों को समझने का महत्वपूर्ण आधार प्रस्तुत करता है।
उन्होंने आधुनिक मनोविज्ञान के संदर्भ में त्रिगुण सिद्धांत की प्रासंगिकता पर भी चर्चा की। व्याख्यान के दौरान भारतीय मनोवैज्ञानिक चिंतन और आधुनिक मनोविज्ञान के बीच संबंधों को लेकर विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के साथ अकादमिक विमर्श हुआ।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. मीनाक्षी ने किया। प्रो. सुप्रीति सुमन ने स्वागत भाषण देते हुए मुख्य अतिथि, शिक्षकों और विद्यार्थियों का स्वागत किया। कार्यक्रम के अंत में डॉ. हिमालय तिवारी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, शिक्षकों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर विभाग की डॉ. प्रगति चतुर्वेदी, डॉ. रविंद्र सिंह, श्री प्रभात रंजन और डॉ. दीनदयाल गुप्ता सहित विभाग के शिक्षक एवं अन्य अतिथि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय मनोवैज्ञानिक चिंतन में व्यक्तित्व की अवधारणा को समझना तथा त्रिगुण सिद्धांत और आधुनिक मनोविज्ञान के बीच संबंध एवं इसकी प्रासंगिकता पर अकादमिक चर्चा को बढ़ावा देना था। व्याख्यान में विद्यार्थियों और शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।