रांची में जल-संरक्षण को लेकर तीन दिवसीय ट्रेनिंग शुरू, 5 राज्यों की 500 पंचायतों को बनाया जाएगा जल-संपन्न
रांची: ग्राम पंचायतों को जल-संपन्न बनाने की दिशा में रांची में तीन दिवसीय Training of Trainers (ToT) Phase-II कार्यक्रम की शुरुआत हुई। यह प्रशिक्षण 9 से 11 सितंबर 2026 तक केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थान, रांची में आयोजित किया जा रहा है।
रांची:- ग्राम पंचायतों को जल-संपन्न बनाने की दिशा में रांची में तीन दिवसीय Training of Trainers (ToT) Phase-II कार्यक्रम की शुरुआत हुई। यह प्रशिक्षण 9 से 11 सितंबर 2026 तक केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थान, रांची में आयोजित किया जा रहा है।
कार्यक्रम का आयोजन झारखंड सरकार के पंचायती राज विभाग की ओर से केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय के सहयोग से किया जा रहा है। प्रशिक्षण में बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल के पंचायती राज विभागों से 30 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं।
इस पहल का उद्देश्य देशभर में 500 ग्राम पंचायतों को जल-संपन्न पंचायत के रूप में विकसित करना है। इसके तहत प्रत्येक भागीदार राज्य की 100 पंचायतों को शामिल किया जाएगा। प्रशिक्षण में जल बजट तैयार करने, जल संरक्षण, जल सुरक्षा योजना, सामुदायिक भागीदारी और स्थानीय स्तर पर जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन पर जोर दिया जा रहा है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पंचायती राज मंत्रालय की संयुक्त सचिव पालका साहनी ने कहा कि जल बजट और जल सुरक्षा योजनाओं के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जल शक्ति के विजन को आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि योजनाएं केवल आंकड़ों पर आधारित न होकर पंचायतों की वास्तविक स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप तैयार होनी चाहिए।
वहीं मंत्रालय के निदेशक विपुल उज्ज्वल ने कहा कि जल की उपलब्धता और उसका प्रभावी प्रबंधन पंचायतों के सामने बड़ी चुनौती है। उन्होंने जल बजट और जल सुरक्षा योजनाओं को महज दस्तावेज नहीं, बल्कि गांवों में जल संरक्षण और जल संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग के लिए एक्शन प्लान बताया।
झारखंड पंचायती राज विभाग की निदेशक राजेश्वरी बी. ने कहा कि पंचायत स्तर पर उपलब्ध जल संसाधनों का सही आकलन कर जल बजट और जल सुरक्षा योजना तैयार करने से जल संकट का खतरा कम किया जा सकता है। उन्होंने जल से जुड़ी विभिन्न सरकारी योजनाओं के बीच बेहतर समन्वय को भी जरूरी बताया।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को जिला, प्रखंड और ग्राम पंचायत स्तर पर लागू किए जा सकने वाले व्यावहारिक तरीकों की जानकारी दी जा रही है। साथ ही जल बजट को ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) से जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।
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