जीबीएम कॉलेज में गुरु पूर्णिमा एवं भारतीय मनोविज्ञान दिवस पर एक दिवसीय व्याख्यान का हुआ आयोजन
गया जी। गौतम बुद्ध महिला कॉलेज में मनोविज्ञान विभाग द्वारा भारतीय मनोविज्ञान दिवस एवं गुरु पूर्णिमा के सुअवसर पर "इंडियन इनरिच्ड साइकोलॉजिकल नॉलेज एण्ड दि इम्पॉर्टेंस अॉफ द गुरु" विषय पर एक दिवसीय व्याख्यान का आयोजन हुआ, जिसमें आमंत्रित मुख्य वक्ता के रूप में कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य एवं मनोविज्ञान के प्रोफेसर डॉ जावैद अशरफ़ रहे। विशिष्ट वक्ता के रूप में कॉलेज की वर्तमान प्रधानाचार्या डॉ सीमा पटेल स्वयं रहीं। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रो. अशरफ़ एवं प्रधानाचार्या डॉ सीमा पटेल एवं उपस्थित प्रोफेसरों ने सामूहिक रूप से दीप प्रज्वलित करके एवं माँ सरस्वती के छायाचित्र पर माल्यार्पण करके किया। प्रधानाचार्या डॉ सीमा पटेल ने प्रधानाचार्य प्रो. डॉ जावैद अशरफ का स्वागत पौधा एवं छात्राओं द्वारा बनाये गये स्मृति चिह्न प्रदान करके किया।
प्रधानाचार्या डॉ सीमा पटेल ने स्वागत वक्तव्य देते हुए, विषय पर अपनी बात रखी। उन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा को भारतीय संस्कृति की आधारशिला बताते हुए दोनों के बीच स्नेह, सम्मान और समझदारी का रिश्ता बताया। वहीं मुख्य वक्ता के रूप में प्रोफेसर अशरफ़ ने गुरु पूर्णिमा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महर्षि वेदव्यास की जयंती को ही गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। महर्षि वेदव्यास ने ही मूल वेद को चार भागों ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद एवं अथर्ववेद में बाँटा था। उन्हें ही महाभारत, पुराणों, तथा ब्रह्मसूत्र का रचयिता भी माना जाता है। आदिगुरु महर्षि वेदव्यास को सभी गुरुओं का प्रतिनिधि मानते हुए भारतीय मनोविज्ञान दिवस को भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा को समर्पित करने के लिए प्रोफेसर अशरफ़ ने मनोविज्ञान विभाग को हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
प्रोफेसर अशरफ़ ने छात्राओं से भारतीय ज्ञान परंपरा से रोचक प्रश्नों को पूछते हुए एवं संदर्भ के अनुरूप शेरों-शायरियों को पढ़ते हुए चारों वेदों, श्री रामायण, श्रीमद्भागवत गीता, पवित्र कुरान, महाभारत आदि के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने मन को मनुष्य का दोस्त भी बताया और दुश्मन भी। डॉ. अशरफ़ ने मन को साधते हुए अच्छी भावना के साथ कार्य करते रहने की बात कही। उन्होंने गुरुभक्त आरुणि, नचिकेता, एकलव्य जैसे गुरुभक्त बालओं का दृष्टांत देते हुए छात्राओं को शिक्षकों एवं गुरुओं के प्रति सम्मान रखने कहा। उद्देश्य सही रखकर मन लगाकर पढ़ाई करने का संदेश दिया। उन्होंने शिक्षकों को कहा कि शिक्षकों को छात्र-छात्राओं के बीच कभी भी विभेद नहीं करना चाहिए। उन्हें कभी भी हतोत्साहित नहीं करना चाहिए। साथ ही गुरु पूर्णिमा मनाना तभी सार्थक है, जबकि विद्यार्थी अपने गुरुजनों के प्रति सम्मान एवं निष्ठा का भाव रखें। डॉ जावैद अशरफ़ ने छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सुंदर सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रशंसा करते हुए कॉलेज परिवार के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
कॉलेज की पीआरओ डॉ रश्मि प्रियदर्शनी ने बताया कि छात्राओं ने गुरुपूर्णिमा पर सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं को सम्मान स्वरूप हस्तनिर्मित रंग-बिरंगे कागजी गुलदस्ते भी भेंट किए। कार्यक्रम में डॉ सहदेब बाउरी, डॉ. शगुफ्ता अंसारी, डॉ कुमारी रश्मि प्रियदर्शनी, डॉ जया चौधरी, डॉ पूजा, डॉ पूजा राय, डॉ अमृता कुमारी घोष, डॉ अनामिका कुमारी, डॉ फरहीन वज़ीरी, डॉ रुखसाना परवीन, डॉ बनीता कुमारी, डॉ प्रियंका कुमारी, डॉ प्यारे माँझी, डॉ आशुतोष कुमार पांडेय, डॉ अफ्शां नाहिद, डॉ शबाना परवीन हुसैन, डॉ नुद्रतुन निसां, डॉ दीपिका, डॉ सपना पांडे, डॉ सुनीता कुमारी, डॉ सुरबाला कृष्णा, डॉ फातिमा, डॉ प्रियंका पांडेय, डॉ गणेश प्रसाद, रौशन कुमार, अभिषेक कुमार, मीरा कुमारी आदि की उपस्थिति रही। धन्यवाद ज्ञापन डॉ प्रमिला कुमारी ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में छात्रा संचिता, आशु, राधिका, रागिनी, साधना प्रिया, खुशी, आकांक्षा, स्मृति, हर्षिता, सुमन, खुशी, काजल, नेहा, शिवानी, वैष्णवी, माधवी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।