जाति आधारित जनगणना की मांग को लेकर राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा ने सौंपा ज्ञापन
रांची। राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा देश में 2021 की जाति आधारित जनगणना कराने के लिए लगातार आंदोलनरत है। इसी क्रम में विभिन्न पार्टी अध्यक्षों, विधायक दल के नेताओं, सांसदों को मांग पत्र सौंप कर जाति आधारित जनगणना कराने हेतु केंद्र सरकार पर दबाव बना रही है।
झारखंड विधान सभा का विशेष सत्र आगामी 11 नवंबर को आहूत की गई है। इस सत्र में जाति आधारित जनगणना करने का प्रस्ताव पास कर केंद्र सरकार को भेजने की मांग
झारखंड के मुख्यमंत्री सह झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन के नाम मांग पत्र प्रदेश महासचिव विनोद पांडेय को सौंप कर विधानसभा के विशेष सत्र में जाति आधारित जनगणना का प्रस्ताव पास कर केंद्र सरकार को भेजने की मांग की गई है।
पत्र में बताया गया है कि जाति आधारित जनगणना नहीं होने से सरकार की तरफ से मिलने वाला लाभ नहीं मिल पा रहा है। 52 प्रतिशत आबादी वाले ओबीसी समुदाय की जब गिनती हो जाएगी, तो सरकार को ओबीसी समुदाय के डेवलपमेंट फंड में वार्षिक 52 प्रतिशत रकम का प्रावधान करना पड़ेगा।
वर्तमान में केंद्र सरकार ओबीसी के विकास हेतु वार्षिक बजट में एक परसेंट से भी कम रकम का प्रावधान करती है।
राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार गुप्ता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट भी कई बार जातीय जनगणना करने का निर्देश दे चुकी है।
यूपीए गठबंधन की सरकार वर्ष 2011 में सामाजिक, आर्थिक जाति जनगणना कराई थी, जिसकी रिपोर्ट एनडीए गठबंधन के समय 2015 में आई। परंतु सरकार ने इसे त्रुटिपूर्ण बता कर ठंडे बस्ते में डाल दिया। तत्कालीन मंत्री अरुण जेटली ने अगले 2021 की जनगणना जातीय आधार पर कराने की घोषणा की थी।राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा केंद्र से भी मांग करती है कि वह अगली जनगणना जाति आधारित करें। मांग पत्र सौंपने वालों में प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार गुप्ता, सुनील जायसवाल, प्रेम नाथ साहू, सचिन कुमार, संतोष कुमार शर्मा का नाम शामिल है।
उक्त जानकारी मोर्चा के मीडिया प्रभारी
अशोक कुमार कुशवाहा ने दी।
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