32 साल की सेवा को शून्य मानने पर पटना हाईकोर्ट नाराज, सेवानिवृत्त कर्मचारी की पेंशन पर 3 महीने में फैसला लेने का निर्देश

पटना: जल संसाधन विभाग, समस्तीपुर में करीब चार दशक तक सेवा देने वाले चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को नियमित नियुक्ति के बाद नया कर्मचारी मानने और उनकी पुरानी सेवा को पेंशन के लिए नहीं जोड़ने के मामले में पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई है। जस्टिस कुमार मनीष की एकल पीठ ने विभाग के संबंधित आदेशों को रद्द करते हुए तीन महीने के भीतर कर्मचारी की पेंशन, वेतन संरक्षण और पुरानी सेवा अवधि की गणना पर नियमानुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

Sep 30, 2026 - 18:20
32 साल की सेवा को शून्य मानने पर पटना हाईकोर्ट नाराज, सेवानिवृत्त कर्मचारी की पेंशन पर 3 महीने में फैसला लेने का निर्देश

पटना:- जल संसाधन विभाग, समस्तीपुर में करीब चार दशक तक सेवा देने वाले चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को नियमित नियुक्ति के बाद नया कर्मचारी मानने और उनकी पुरानी सेवा को पेंशन के लिए नहीं जोड़ने के मामले में पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई है। जस्टिस कुमार मनीष की एकल पीठ ने विभाग के संबंधित आदेशों को रद्द करते हुए तीन महीने के भीतर कर्मचारी की पेंशन, वेतन संरक्षण और पुरानी सेवा अवधि की गणना पर नियमानुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

मामला पूर्वी चंपारण निवासी विपिन कुमार वर्मा से जुड़ा है। उन्हें 16 जून 1980 को जल संसाधन विभाग, समस्तीपुर में टाइपिस्ट के पद पर दैनिक वेतनभोगी के रूप में नियुक्त किया गया था। करीब 32 वर्षों तक लगातार सेवा देने के बाद 5 दिसंबर 2012 को विभाग ने उन्हें निम्न वर्गीय लिपिक के पद पर नियमित किया। हालांकि, विभाग ने इसे नई नियुक्ति मान लिया।

इस फैसले के कारण उनका मूल वेतन 9,840 रुपये से घटाकर 7,730 रुपये कर दिया गया। वहीं, नवंबर 2019 में सेवानिवृत्त होने के बाद विभाग ने 1980 से 2012 तक की उनकी सेवा अवधि को पेंशन संबंधी लाभों के लिए मान्यता नहीं दी। इससे उन्हें पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ा।

सुनवाई के दौरान बिहार सरकार की ओर से दलील दी गई कि दैनिक वेतनभोगी के रूप में की गई सेवा को सरकारी प्रयोजन या पेंशन के लिए सेवा अवधि नहीं माना जा सकता। सरकार ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता ने वर्ष 2012 में नई नियुक्ति स्वीकार की थी, इसलिए अब वह अपनी पुरानी सेवा अवधि को जोड़ने का दावा नहीं कर सकते।

अदालत ने राज्य सरकार की इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि राज्य एक संवैधानिक नियोक्ता है और कर्मचारियों के साथ उसके व्यवहार में समानता तथा न्याय के सिद्धांतों का पालन होना चाहिए।

हाईकोर्ट ने यह भी पाया कि समस्तीपुर अंचल में याचिकाकर्ता से कनिष्ठ कर्मचारियों महेश राय, दिलीप कुमार राय और बिपिन कुमार सिंह को वर्ष 1988 से काल्पनिक नियमितीकरण और पेंशन का लाभ दिया गया था, जबकि विपिन कुमार वर्मा को इससे वंचित रखा गया। अदालत ने इस अंतर को समानता के अधिकार से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना।

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के धर्म सिंह (2025) और भीखनी देवी (2026) मामलों का भी हवाला दिया। इसके बाद समस्तीपुर के मुख्य अभियंता और अधीक्षण अभियंता के उन आदेशों को रद्द कर दिया, जिनके जरिए याचिकाकर्ता के वेतन संरक्षण और पुरानी सेवा अवधि जोड़ने के दावे को खारिज किया गया था।

हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को तीन महीने के भीतर बिहार सेवा संहिता के नियम 78 के तहत वेतन संरक्षण, पेंशन और पुरानी सेवा अवधि की गणना पर स्पष्ट एवं तर्कसंगत आदेश पारित करने का निर्देश दिया है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0