एसोचैम का इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज पर नॉलेज मैनेजमेंट वर्चुअल मीट आयोजित

Jun 16, 2024 - 05:36
एसोचैम का इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज पर नॉलेज मैनेजमेंट वर्चुअल मीट आयोजित

रांची। एसोचैम की ओर से बुधवार को इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज पर नॉलेज मैनेजमेंट वर्चुअल मीट का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत एसोचैम के रांची कार्यालय के क्षेत्रीय निदेशक भरत जायसवाल ने की
इस अवसर पर डॉ.एमके वाजपेयी (सीओ-अध्यक्ष जेएसडीसी और वीसी कैपिटल यूनिवर्सिटी, झारखंड) ने कहा कि प्रौद्योगिकी का महत्व काफी बढ़ गया है। अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम को प्राथमिकता दी जा रही है। प्रौद्योगिकी वर्तमान समय की जरूरत है।
वर्चुअल बैठक में मनु सेठ ने कहा कि अवसरों के साथ-साथ चुनौतियों को समझना जरूरी है। आने वाला समय प्रौद्योगिकी का है।
झारखंड राज्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता विकास परिषद के मुकेश सिन्हा ने कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म शिक्षा जैसे बेहतर जुड़ाव के लिए एआई को भी सक्षम कर रहा है। वर्चुअल बैठक में देविंदर नारायण (सह-अध्यक्ष एसोचैम झारखंड राज्य शिक्षा विकास परिषद) ने प्रौद्योगिकी से संबंधित नई तकनीकें सीखने पर ध्यान केंद्रित करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सीखने के संसाधनों को भी अपडेट करने की जरूरत है।
सुश्री दिव्या लाल, (प्रबंध निदेशक, फ्लिपलर्न एजुकेशन प्रा.लिमिटेड) ने कहा कि हमें भारतीय शिक्षा प्रणाली में होमवर्क प्रणाली को बदलने की जरूरत है। स्कूल, शिक्षक और छात्र, हर किसी को सीखने के लिए होमवर्क के बजाय सीखने का एक हिस्सा होना चाहिए।
इस अवसर पर राघव पोदार, (अध्यक्ष, पोदार शिक्षा समूह) ने कहा कि टेक्नोलॉजी ने सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया मे सब कुछ बदल दिया है।
एपी शर्मा, (प्राचार्य, बिड़ला पब्लिक स्कूल, कतर) ने कहा हमें विपरीत परिस्थितियों को अनुकूल बनाना चाहिए। प्रौद्योगिकी का अनुप्रयोग महत्वपूर्ण है। प्रगतिशील सोच भी होनी चाहिए।
मिटिंग में सुश्री ज्योति तिवारी, (संस्थापक और सीईओ, इनजेनियसमाइंड्स) ने कहा हम उच्च छात्रों, मेडिकल छात्रों, विदेशों में छात्रों के बारे में बात क्यों नहीं कर रहे हैं । हमारे पास बहुत सारे डेटा हैं, लेकिन इसे सिंक्रोनाइज़ कैसे करें और बेहतर परिणामों के लिए इसका उपयोग कैसे करें? इस दिशा में प्रयास जरूरी है।
विशाल बिष्ट, (संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी, मार्क्समैन और कोसीन) ने कहा पहले स्कूल और कॉलेज नई प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए प्रतिरोधी थे, लेकिन महामारी के बाद उन्होंने आसानी से इसे अनुकूलित किया। समय है कि हर मुद्दे पर तकनीकी नजरिए से सोचना शुरू किया जाए।

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