"प्रेमचंद साहित्य के आकाश थे":- अनंत धीश अमन
गया जी । प्रेमचंद का नाम हिंदी साहित्य में बड़े आदर और सम्मान के साथ लिया जाता है। उनकी कहानियाँ और अन्य रचनाएँ आज भी उतनी ही श्रद्धा और रुचि से पढ़ी जाती हैं। जब उनकी कहानियों का मंचन रंगमंच पर होता है, तो दर्शक केवल उनका आनंद ही नहीं लेते, बल्कि उनमें निहित सामाजिक संदेशों से भी गहराई से जुड़ जाते हैं। 'ईदगाह' का हामिद आज भी अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर अपनों की आवश्यकताओं को प्राथमिकता देना सिखाता है। 'पूस की रात' का हल्कू आज भी किसानों की विवशता और आर्थिक शोषण का प्रतीक है, जहाँ कंबल के लिए बचाए गए पैसे भी साहूकार के कर्ज़ में चले जाते हैं। 'बूढ़ी काकी' आज भी समाज में उपेक्षा और तिरस्कार का दर्द झेलती अनेक वृद्धाओं की प्रतिनिधि बनकर हमारे सामने खड़ी दिखाई देती हैं। निस्संदेह, समय के साथ समाज में परिवर्तन आया है और अनेक कुरीतियाँ कम हुई हैं। समाज धीरे-धीरे अधिक संवेदनशील, नैतिक और जागरूक बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। फिर भी कुछ बुराइयाँ अभी शेष हैं। आशा यही है कि ये कुरीतियाँ भी एक दिन समाप्त होंगी, और समाज निरंतर अच्छाई, संवेदनशीलता तथा मानवीय मूल्यों की ओर अग्रसर रहेगा। यही प्रेमचंद के साहित्य की सबसे बड़ी सार्थकता है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0









