चिन्मय मिशन के 75 वर्ष के अमृतकाल में गया जी पहुँची आध्यात्मिक भारत भ्रमण यात्रा
गया जी। चिन्मय मिशन के 75 वर्ष के अमृतकाल के अवसर पर चल रहे आध्यात्मिक भारत भ्रमण के अंतर्गत 10 एवं 11 अगस्त को गया जी, बिहार में दो दिवसीय प्रवास हुआ। इस दौरान आध्यात्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से भारतीय सनातन परंपरा, अध्यात्म और जीवन-मूल्यों को जन-जन तक पहुँचाने का संदेश दिया गया।
प्रवास के दौरान संघ कार्यालय एवं पंजाबी भवन में युवाओं के साथ प्रेरणादायी संवाद आयोजित किया गया। युवाओं ने संकल्प लिया कि श्रीमद्भगवद्गीता के पाँच श्लोकों को “गीता पंचामृत” के रूप में प्रत्येक युवा तक पहुँचाया जाएगा, ताकि भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और जीवन-मूल्यों का संदेश नई पीढ़ी तक प्रभावी रूप से पहुँच सके।
इस विशेष अवसर पर चिन्मय मिशन के प्रमुख स्वामी मित्रानंद सरस्वती जी का सान्निध्य एवं मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। उन्होंने युवाओं को भारतीय आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ने तथा गीता के ज्ञान को अपने जीवन में उतारकर समाज तक पहुँचाने के लिए प्रेरित किया।
गया जी एवं बोधगया की पावन धरती पर विष्णुपद मंदिर, जगन्नाथ मंदिर, महाबोधि मंदिर एवं बोधगया मठ में विशेष पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान प्रार्थना की गई कि भारत की सनातन आध्यात्मिक ऊर्जा सदैव विश्व को प्रकाशित करती रहे तथा मानवता को शांति, सद्भाव और सत्य के मार्ग पर प्रेरित करती रहे।
इस गया प्रवास एवं कार्यक्रम को सफल बनाने में गया के साहित्यकार एवं समाजसेवी अनंत धीश अमन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके साथ गया के प्रबुद्ध आध्यात्मिक एवं सामाजिक लोगों ने यात्रा के विभिन्न कार्यक्रमों में सक्रिय सहभागिता की।
इस अवसर पर मणिलाल बारिक, राय मदन किशोर, उषा डालमिया, बिहार धार्मिक न्यास बोर्ड के सदस्य स्वामी विवेकानंद गिरि जी महाराज, अनिल स्वामी एवं सच्चिदानंद प्रेमी जी सहित शहर के अनेक गणमान्य नागरिकों, शिक्षाविदों एवं प्रबुद्धजनों ने सहभागिता की और इस अमृत यात्रा के आध्यात्मिक संदेश एवं अनुभव का रसास्वादन किया।
चिन्मय मिशन की इस यात्रा ने गया की आध्यात्मिक धरती पर युवा शक्ति, गीता ज्ञान और सनातन चेतना को एक साथ जोड़ने का संदेश दिया। युवाओं के संकल्प और प्रबुद्ध समाज की सहभागिता से यह प्रवास आध्यात्मिक जागरण एवं सामाजिक सरोकार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया।
गीता का ज्ञान — युवा शक्ति का संकल्प — भारत की आध्यात्मिक चेतना — विश्व कल्याण।