अधिकारियों की तकनीकी गलती का खामियाजा ठेकेदार पर नहीं डाल सकते: पटना हाईकोर्ट ने रोका भुगतान जारी करने का दिया आदेश
पटना। पटना हाईकोर्ट ने सरकारी अधिकारियों की प्रशासनिक और तकनीकी कमियों का खामियाजा ठेकेदार पर डालने की कार्यशैली पर सख्त टिप्पणी की है। जस्टिस जी. अनुपमा चक्रवर्ती की एकल पीठ ने ठेकेदार नवीन कुमार की याचिका स्वीकार करते हुए खगड़िया जिलाधिकारी के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके जरिए ठेकेदार का बकाया भुगतान और सिक्योरिटी डिपॉजिट रोक दिया गया था।
पटना। पटना हाईकोर्ट ने सरकारी अधिकारियों की प्रशासनिक और तकनीकी कमियों का खामियाजा ठेकेदार पर डालने की कार्यशैली पर सख्त टिप्पणी की है। जस्टिस जी. अनुपमा चक्रवर्ती की एकल पीठ ने ठेकेदार नवीन कुमार की याचिका स्वीकार करते हुए खगड़िया जिलाधिकारी के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके जरिए ठेकेदार का बकाया भुगतान और सिक्योरिटी डिपॉजिट रोक दिया गया था।
मामला मुख्यमंत्री शहरी विकास योजना के तहत खगड़िया जिले में बखरी बस स्टैंड से बलुआही बापू पार्क तक 2.70 किलोमीटर बाईपास सड़क निर्माण से जुड़ा है। बेगूसराय निवासी और ग्रामीण कार्य विभाग के पंजीकृत श्रेणी-II ठेकेदार नवीन कुमार को करीब 1.37 करोड़ रुपये की अनुबंध राशि पर यह काम मिला था।
ठेकेदार ने निर्धारित 12 महीने की अवधि में सड़क निर्माण का काम पूरा कर लिया और कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र भी प्राप्त किया। अनुबंध राशि में से 1,22,89,020 रुपये का भुगतान किया जा चुका था, लेकिन अंतिम बिल की 13,67,134 रुपये और सिक्योरिटी डिपॉजिट की 6,14,451 रुपये की राशि, यानी कुल 19,81,585 रुपये, रोक दी गई।
मामले में पहले भी वर्ष 2017 में हाईकोर्ट ने डीएम खगड़िया को ठेकेदार के दावे का निपटारा करने का निर्देश दिया था। इसके बाद 15 दिसंबर 2017 को डीएम ने भुगतान का दावा खारिज कर दिया। आदेश में विभागीय अधीक्षण अभियंता की ओर से उचित पर्यवेक्षण नहीं होने, मेजरमेंट बुक में कमियों और एस्टीमेट में तकनीकी खामियों का हवाला दिया गया था।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर विभागीय अधिकारियों ने प्रशासनिक जिम्मेदारियों, पर्यवेक्षण या रिकॉर्ड-कीपिंग में लापरवाही की है, तो उसका दोष ठेकेदार पर नहीं डाला जा सकता। जब काम पूरा हो चुका हो और ठेकेदार की ओर से किसी चूक या अनुबंध उल्लंघन का प्रमाण नहीं हो, तो उसका बकाया भुगतान रोकना उचित नहीं है।
कोर्ट ने डीएम खगड़िया के 15 दिसंबर 2017 के आदेश को रद्द करते हुए अंतिम बिल और सिक्योरिटी डिपॉजिट की रोकी गई राशि जारी करने का निर्देश दिया। साथ ही पूर्व आदेश के अनुरूप स्वीकृत बकाया राशि पर 5 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज के साथ भुगतान करने का भी निर्देश दिया गया।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0







