खाली पदों के भरोसे झारखंड के जंगल, अतिरिक्त प्रभार से चल रहा वन विभाग

झारखंड की पहचान उसके घने जंगलों और समृद्ध वन संपदा से है, लेकिन इन्हीं जंगलों की सुरक्षा और निगरानी करने वाला वन विभाग लंबे समय से कर्मचारियों और अधिकारियों की कमी से जूझ रहा है। राजधानी रांची में ही सहायक वन संरक्षक (ACF), रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर (RFO) और फॉरेस्टर के 33 पद वर्षों से रिक्त बताए जा रहे हैं।

Sep 25, 2026 - 08:42
खाली पदों के भरोसे झारखंड के जंगल, अतिरिक्त प्रभार से चल रहा वन विभाग

रांची, 24 सितंबर:- झारखंड की पहचान उसके घने जंगलों और समृद्ध वन संपदा से है, लेकिन इन्हीं जंगलों की सुरक्षा और निगरानी करने वाला वन विभाग लंबे समय से कर्मचारियों और अधिकारियों की कमी से जूझ रहा है। राजधानी रांची में ही सहायक वन संरक्षक (ACF), रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर (RFO) और फॉरेस्टर के 33 पद वर्षों से रिक्त बताए जा रहे हैं।

पदों के खाली रहने का सीधा असर वन क्षेत्रों की निगरानी, पौधारोपण, पौधों के संरक्षण, अतिक्रमण रोकने और प्राकृतिक वनों के पुनर्जनन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों पर पड़ रहा है। फील्ड स्तर पर पर्याप्त अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी के कारण विभागीय कामकाज का अतिरिक्त बोझ मौजूदा अधिकारियों पर बढ़ गया है।

अतिरिक्त प्रभार से संभाली जा रही जिम्मेदारी

रिक्त पदों के कारण उत्पन्न प्रशासनिक कमी को तत्काल संभालने के लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने कई अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी है। 18 सितंबर 2026 को जारी आदेश के तहत नौ वन क्षेत्र पदाधिकारियों (RFO) और सहायक वन संरक्षकों (ACF) को उनके मूल दायित्व के साथ अतिरिक्त वन प्रक्षेत्र और वन प्रमंडल का काम भी सौंपा गया है।

इन अधिकारियों को अब अपने नियमित कार्य के अलावा अतिरिक्त क्षेत्रों की जिम्मेदारी भी संभालनी होगी। विभाग की ओर से यह व्यवस्था नियमित नियुक्तियां होने तक अस्थायी तौर पर लागू की गई है।

जंगलों की निगरानी पर बढ़ रहा दबाव

वन विभाग के अधिकारियों और फील्ड कर्मियों के पद लंबे समय से रिक्त रहने से जंगलों की नियमित निगरानी चुनौती बन रही है। वन क्षेत्रों में अवैध कटाई, अतिक्रमण, वन्यजीव संरक्षण, पौधारोपण और नए पौधों की देखभाल जैसे कार्यों के लिए पर्याप्त मानव संसाधन जरूरी है।

ऐसे में अतिरिक्त प्रभार के जरिए विभागीय कामकाज को चलाने की व्यवस्था फिलहाल तत्काल जरूरत को पूरा कर रही है, लेकिन लंबे समय तक खाली पदों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी से काम चलाना विभाग के लिए चुनौती बना रह सकता है।

नियमित नियुक्तियों का इंतजार

वन विभाग में रिक्त पदों को भरने के लिए नियमित नियुक्तियां होने तक अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था जारी रहेगी। अब देखना होगा कि विभाग में खाली पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया कब पूरी होती है और फील्ड स्तर पर मानव संसाधन की कमी कब दूर होती है।

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