परीक्षा की तैयारी छोड़कर दसवीं के छात्र बड़े होटल में कर रहे हैं फेयरवेल पार्टी, स्कूल की नहीं है अनुमति

प्रधानाचार्या ने बच्चों के अभिभावकों से अपील करते हुए कहा है कि बच्चों की माँग पर सही ग़लत की पहचान करना और अपने बच्चों के भविष्य को सुरक्षित रखना भी अभिभावकों का प्रथम कर्तव्य होता है। इसलिए अभिभावकों को विशेष ध्यान देते हुए अपने बच्चों को लक्ष्य प्राप्ति तक ऐसे भटकाव भरे आयोजनों से दूर रखना होगा।

Nov 14, 2023 - 04:49
परीक्षा की तैयारी छोड़कर दसवीं के छात्र बड़े होटल में कर रहे हैं फेयरवेल पार्टी, स्कूल की नहीं है अनुमति

दसवीं बोर्ड की परीक्षा सभी बच्चों के लिए भविष्य की आधारशिला होती है। पूरे 10 साल की मेहनत को एक धागे में पिरोकर दसवीं की परीक्षा में अच्छे नंबर लाकर बच्चे सुनहरे भविष्य की माला पहनने को बेताब रहते हैं। बच्चों के साथ-साथ उनके माता-पिता को भी पता है कि यदि उनके बच्चे दसवीं की परीक्षा में अच्छे नंबर नहीं लाएँगे तो फिर आगे उच्च शिक्षा के लिए अच्छे संस्थान में दाख़िला मिलना मुश्किल हो जाएगा।

दसवीं के छात्र ही ले रहे हैं 1700/- रुपये प्रति छात्र इंट्री फ़ीस

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शहर के एक प्रतिष्ठित विद्यालय के दसवीं कक्षा के कुछ तथाकथित होनहार बच्चों ने अपनी पहुँच का इस्तेमाल करते हुए शहर के एक बड़े होटल में फ़ेयरवेल पार्टी का आयोजन किया है। जानकारी के अनुसार इस पार्टी में चार महीने बाद होनेवाले दसवीं की परीक्षा में शामिल विद्यार्थियों को ही आमंत्रित किया गया है। पार्टी के लिए बाक़ायदा लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग ड्रेस कोड भी जारी किया गया है। लगभग 120 विद्यार्थियों के लिए इस पार्टी का आयोजन किया जा रहा है। शुरुआत में पार्टी में शामिल होनेवाले प्रत्येक विद्यार्थियों से 2000/- रुपये की माँग की गई थी, लेकिन विद्यार्थियों की संख्या कम होने के कारण एंट्री फ़ीस को कम करते हुए 1700/- रुपया कर दिया गया है। आयोजकों द्वारा जारी किए गए प्रचार में THEEXIBITH नामक इवेंट कंपनी को इस पार्टी का आयोजक बताया गया है। फ़ीस के लिए ऑनलाइन पेमेंट के माध्यम से जो QR कोड जारी किया गया है वह विद्यालय के दसवीं कक्षा के ही एक छात्र के नाम से पंजीकृत है। दसवीं के एक छात्र से बात करने पर पता चला कि आयोजन का प्रचार-प्रसार करने के लिए आयोजक छात्रों के द्वारा एक ह्वाट्सऐप ग्रुप भी चलाया जा रहा है, जिसमें दसवीं के छात्रों का नंबर पता कर उन्हें जोड़ दिया जा रहा है। छात्रों को बताया जा रहा है कि इसमें स्कूल की भी अनुमति दी गई है।

विद्यालय की प्रधानाचार्या ने जतायी चिंता 

इस मसले पर जब विद्यालय की प्रधानाचार्या से बात की गई तो उन्होंने इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए काफ़ी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस आयोजन की उन्हें जानकारी मिली है और इसमें विद्यालय की कोई भागीदारी या अनुमति नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी अभिभावकों को स्कूल के तरफ़ से एक संदेश भी जारी किया गया है कि इस आयोजन में अपने बच्चों को शामिल न करें। उन्होंने दसवीं की परीक्षा की अहमियत को समझाते हुए कहा कि यह बेशक़ीमती समय है, जिसे बच्चों को यूँ ही नहीं बर्बाद करनी चाहिए। अभी बच्चों को सिर्फ़ अपनी पढ़ाई पर ध्यान देनी चाहिए, ताकि उनके उज्ज्वल भविष्य की मज़बूत नींव रखी जा सके। प्रधानाचार्या ने बच्चों के अभिभावकों से अपील करते हुए कहा है कि बच्चों की कोई भी माँग को अपने विवेक का इस्तेमाल करते हुए पूरा करें। हालाँकि सभी अभिभावक अपने बच्चों को खुश देखना चाहते हैं, लेकिन सही ग़लत की पहचान करना और अपने बच्चों के भविष्य को सुरक्षित रखना भी अभिभावकों का प्रथम कर्तव्य होता है। कहीं ऐसा न हो कि चंद पलों की चकाचौंध भरी रोशनी में आने वाला भविष्य कहीं गुम हो जाये। इसलिए अभिभावकों को विशेष ध्यान देते हुए अपने बच्चों को लक्ष्य प्राप्ति तक ऐसे भटकाव भरे आयोजनों से दूर रखना होगा। विद्यालय तो बोर्ड परीक्षा के मद्देनज़र दसवीं के छात्रों के लिए स्पोर्ट्स सहित अन्य सभी आयोजनों को स्थगित कर देती है ताकि बच्चों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े और वे सिर्फ़ अपनी पढ़ाई पर फोकस कर सकें।

ज़िम्मेवारी किसकी?

अब सवाल उठता है कि जिन बच्चों को अपना भविष्य गढ़ने के लिए विद्यालय में पढ़ाई करनी चाहिए, उन बच्चों में आख़िर ऐसे विचार आए कहाँ से। क्या विद्यालय इसके लिए ज़िम्मेवार नहीं है? क्या विद्यालय का वातावरण/माहौल इसके लिए ज़िम्मेवार नहीं है? विद्यालय के बच्चों के द्वारा एक बड़ा आयोजन किया जा रहा है और विद्यालय इसमें सिर्फ़ मूक़दर्शक बना हुआ है, आख़िर क्यों? यदि इस आयोजन के दरम्यान कुछ अनहोनी हो जाती है तो फिर उसकी ज़िम्मेवारी किसकी होगी? अभिभावक अपने बच्चों के सुनहरे भविष्य की कामना लिए अच्छे स्कूलों में दाख़िला करवाते हैं। अपने जीवन के अहम समय इन विद्यालयों में बिताने के बाद भी बच्चे अपने भविष्य के प्रति सजग नहीं हैं, तो फिर आख़िरकार ज़िम्मेवारी किसकी होगी? ऐसे में विद्यालय प्रबंधन को इस आयोजन पर रोक लगाकर बच्चों के प्रति अपनी ज़िम्मेवारी निभानी चाहिए, अन्यथा विद्यालय प्रबंधन चाहे लाख सफ़ाई दे, कहीं न कहीं विद्यालय को इसके लिए ज़िम्मेवार माना ही जाएगा।

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