श्रद्धांजलि : ममतामई मां कमला देवी आजीवन ममता बिखेरती रही थीं
कमला देवी को भारतीय रीति रिवाज और परंपरा पर बहुत ही विश्वास था। उनका मानना था कि भारतीय परंपरा ही दुनिया की सर्वश्रेष्ठ परंपरा है।
हजारीबाग नगर की वरिष्ठ समाज सेविका, धर्मानुरागी सह प्रतिष्ठित अलंकार ज्वेलर्स के संचालक राजेंद्र लाल की धर्मपत्नी कमला देवी का असमय जाना समाज के लिए अपूरणीय क्षति के समान है। उनका संपूर्ण जीवन समाज सेवा और एक आदर्श परिवार बनाने को समर्पित रहा था। वह एक सफल गृहणी के साथ समाज सेवा के लिए सदा आतुर रहती थीं। वह घर पर आए अतिथियों का सत्कार भगवान का रूप मानकर किया करती थीं। वह विभिन्न पर्वों व त्योहारों पर नियमित रूप से गरीबों के बीच जाकर कुछ न कुछ दान दिया करती थीं। वह नियमित रूप से मंदिर जाया करती थीं। ईश्वर के प्रति उनकी गहरी आस्था थीं। वह एक धर्मानुरागी विदुषी महिला थीं। उन्होंने सामाजिक संगठन रौटरी क्लब से जुड़कर कई प्रोजेक्टों को सफलता पूर्वक संपन्न किया था। खासकर बच्चों के बहुमुखी विकास के कार्यक्रम में उनकी सेवा अतुलनीय थी। वह बच्चों की सेवा ऐसी करती थीं कि जैसे ये बच्चे उनके अपने हों। बच्चों के प्रति उनका यह स्नेह व ममता उन्हें ममतामई मां के नाम से एक नहीं पहचान दी थी। उनकी साथी सामाजिक सेविकाएं उन्हें कमला देवी के नाम की जगह ममतामई मां के नाम से संबोधित करने लगी थी। जब वह यह नाम सुनती तो उनके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान आ जाती थी।
अनुशासन को बनाया सफलता का मूल मंत्र
वह अपने काम के प्रति सदा गंभीर भी बनी रही थीं। अनुशासन से उनका गहरा नाता था। वह समय की पाबंदी थीं। वह हर काम समय पर किया करती थीं। वह बचपन से ही सहज, सरल, प्रकृति की रही थीं। उनका यह स्वभाव आजीवन बना रहा था । उन्हें कभी भी उदास नहीं देखा गया। वह हमेशा अपने को विभिन्न कामों में व्यस्त रखती थीं। उनके चेहरे पर सदा मुस्कान बनी रहती थी। वह एक सकारात्मक चिंतन की साहसिक महिला थी। इस बात को उन्होंने रौटरी क्लब के कई प्रोजेक्टों के माध्यम से प्रमाणित किया था। कम अवधि मिलने पर भी में उन्होंने कई प्रोजेक्टों को बहुत ही सफलतापूर्वक संपन्न किया था। जबकि प्रोजेक्ट में शामिल सदस्यों ने उन्हें यह कहा था कि इतने कम समय में यह प्रोजेक्ट कैसे पूरा होगा ? तब उन्होंने कहा था कि हम सब मिलजुल कर और समय बद्ध होकर अगर काम करते हैं, तो सफलता जरूर मिलेगी। उनकी इस बात पर साथी सदस्यों का भरपूर सहयोग मिला और एक के बाद एक प्रोजेक्ट सफल होते गए थे। वह किसी भी कार्य को बहुत ही मन लगाकर और समर्पित भाव से किया करती थीं। उनका काम करने का यह जज्बा सबसे निराला था। वह विपरीत परिस्थितियों में भी अपना धैर्य नहीं खोती थीं। वह अपने साथी सदस्यों के लिए एक रोल मॉडल बन चुकी थीं।
बड़े घर की बेटी और एक कुशल गृहिणी
कमला देवी एक बड़े घर की बेटी थी। लेकिन उन्हें बड़े घर की बेटी होने का कोई गुमान नहीं था। उनकी शादी आज से इकावन वर्ष पूर्व हजारीबाग नगर के प्रतिष्ठित स्वर्ण व्यवसायी राजेंद्रा लाल से हुई थी। तब राजेंद्र लाल का पूरा परिवार संयुक्त रुप से रहा करता था । स्वाभाविक है कि संयुक्त परिवार में सदस्यों की संख्या काफी रहती है। ऐसे परिवारों में महिलाओं की जिम्मे काफी काम रहता है। शादी के बाद कमला देवी के समक्ष एक बड़े परिवार की जवाबदेही आ गई थी। उन्होनें इस जवाबदेही को बहुत ही निष्ठा के साथ लिया। सबसे पहले वह ससुराल के काम काज को बहुत ही बारीकी के साथ सीखीं। देखते ही देखते वह गृह कार्य की पारंगत भी बन गई थीं। वह घर के हर कार्यों को ऐसे संपन्न करने लगी थी कि जैसे वह इसकी अभ्यस्त हो। आज की नव विवाहित कई बहूओं को कमला देवी से सीख लेने की जरूरत है । जहां एक ओर कई नवविवाहित बहुएं घर के कार्यों को करने में नाक भांव सिकुड़ने लगती है । वहीं कमला देवी एक बड़े घर की बेटी होने के बावजूद घर के हर छोटे बड़े कामो को बहुत ही सलिके के साथ सीखकर संपन्न कर रही थीं। कमला देवी के समक्ष घर के इतने काम का प्रेशर होने के बावजूद वह कभी भी अपने पति से इसकी शिकायत नहीं की बल्कि रात्रि में प्रतिष्ठान से घर आने पर वह अपने पति का बहुत ही बढ़िया ढंग से ख्याल रखती रही थीं। उनकी यह बात कहते - कहते राजेंद्र लाल की आंखें भर आई थीं।
आदर्श बहू और बच्चों की दुलारी भाभी-माँ
धीरे-धीरे कर कमला देवी घर की एक आदर्श बहू बन गई। वह अपने सास - ससुर, चाचा सास - ससुर, चचेरे जेठ, देवर सहित घर के सभी सदस्यों का बहुत ही बेहतर ढंग से ख्याल रखने लगी थी। इस दरमियान उन्होंने कभी भी चचेरा और अपना बोलकर कभी भेद नहीं किया। उनका घर के सभी के साथ समान भाव बना रहा था। वह खासकर घर के छोटे सदस्यों का ख्याल रखना कभी भूलती थीं। वह एक पढ़ी-लिखी आधुनिक नारी थीं। वह आधुनिक शिक्षा के महत्व को बखूबी समझती थीं। इसलिए वह हमेशा घर के छोटे बच्चों की पढ़ाई लिखाई पर ध्यान देती रही थीं। घर पर बच्चों को ट्यूशन देने के लिए टीचर आते थे । इसके बावजूद वह बच्चों से कोर्स संबंधित जानकारियां लेती रहती थीं। साथ ही वह बच्चों को प्रॉपर गाइडेंस भी दिया करती थीं। समय-समय पर बच्चों के पेरेंट्स के रूप में स्कूल जाया करती थीं। वह घर के बच्चों का ख्याल एक मां के रूप में रखती थी। इसलिए वह एक भाभी के साथ भाभी मां भी बन गई थी। घर के सभी बच्चें कमला देवी को बहुत प्यार रहे थे। घर के बच्चे अपने-अपने मन की बातें अपने-अपने माता-पिता से न बोलकर सीधे अपनी भाभी मां से कहा करते थे । कमला देवी भी बच्चों की हर बातों को बहुत ही ध्यान से सुनती और निराकरण का हर संभव प्रयास भी किया करती रही थीं।
धैर्य और प्रतिभा की धनी व्यक्तित्व
समय के साथ एक दिन कमला देवी का परिवार भी अलग-अलग हुआ। कमला देवी ने परिवार को एकजुट रखने का हर संभव प्रयास भी किया था। लेकिन होनी को कौन टाल सकता है । इस विकट परिस्थिति में वह अपने पति राजेंद्र लाल का पूरे धैर्य से साथ दी थी। उन्होंने अपने पति का कभी भी मनोबल नहीं गिरने दिया। दोनों ने मिलजुल कर श्री अलंकार ज्वेलर्स का नीव रखा । दोनों ने मिलजुलकर सीमित पूंजी में कुछ ही वर्षों में श्री अलंकार ज्वेलर्स को नगर का सर्वश्रेष्ठ ज्वेलर्स के रूप में तब्दील कर दिया। एक ओर जहां राजेंद्र लाल अपने प्रतिष्ठान को आगे बढ़ाने में लगे थे, वहीं दूसरी ओर कमला देवी अपने गृह कार्य के साथ तीनों बेटियों और एक पुत्र को उचित शिक्षा प्रदान करने में लगी थी। उन दोनों ने अपने चारों बच्चों को उचित शिक्षा प्रदान की। समय पर उन दोनों ने अपनी तीनों पुत्रियों का विवाह अच्छे परिवार में किया। वहीं एक पुत्र भास्कर वर्मा उच्च शिक्षा हासिल कर श्री अलंकर ज्वैलर्स का संचालन कर रहे हैं।
सुख में न अति उत्साह और दुख में न घबराहट
कमला देवी को भारतीय रीति रिवाज और परंपरा पर बहुत ही विश्वास था। उनका मानना था कि भारतीय परंपरा ही दुनिया की सर्वश्रेष्ठ परंपरा है। इसलिए वह हर वर्ष अपनी शादी की सालगिरह बहुत ही धूमधाम से मनाया करती थीं। यह मेरा अहोभाग्य रहा कि उन दोनों की पचीसवीं और पचासवीं शादी की सालगिरह का साक्षी रहा था । उक्त दोनों अवसरों पर राजेंद्र लाल ने बड़े ही गर्व के साथ कहा कि 'कमला देवी जैसी जीवन संगिनी पाकर मेरा जीवन धन्य हो गया। वह कभी भी दु:ख के समय घबराई नहीं और न सुख के समय बौराई ।' इस छोटे से वाक्य में समाज का एक बहुत बड़ा दर्शन छुपा हुआ है । हर व्यक्ति अपनी सोच और दैनंदिन के साकारात्मक कार्यों से ही आगे बढ़ता है। सुख-दुख जीवन में लगा रहता है। व्यक्ति को विपत्ति के समय अपने धैर्य को कभी भी नहीं खोना चाहिए। जब व्यक्ति के पास बहुत धन, पद और प्रतिष्ठा आ जाए तो बौराना नहीं चाहिए बल्कि धन का एक वाजिब हिस्सा समाज के कल्याण में लगा देना चाहिए। कमला देवी एक पढ़ी -लिखी विदुषी महिला थी। उन्होंने घर के कार्यों के साथ सामाजिक दायित्व का निर्वहन बेहतर ढंग से कर एक उदाहरण प्रस्तुत किया था। उनका जाना सकल समाज के लिए अपूरणीय क्षति है। उनका जीवन सकल समाज के लिए अनुकरणीय है।
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