TMC के 'इश्तेहार' पर मचा सियासी बवाल, गिरिराज सिंह का ममता बनर्जी पर वार, कहा : दीदी का हिडन एजेंडा आया सामने
गिरिराज सिंह ने कहा है कि ममता बनर्जी उर्दू में घोषणा-पत्र जारी कर सिर्फ दिखावा नहीं कर रही हैं। उनका असली एजेंडा सरिया कानून लाने और बंगाल को बांग्लादेश बनाने का है।
NEWS DESK : पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही सियासी माहौल गरमाता जा रहा है। इस बीच तृणमूल कांग्रेस के चुनावी घोषणा-पत्र को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है, जिसने राजनीतिक बहस को भाषा और पहचान के मुद्दे तक पहुंचा दिया है।
दरअसल, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता में पार्टी का घोषणा-पत्र ‘बांग्लार जन्नो दिदिर 10 प्रोतिग्या’ पेश किया, जिसे ‘इश्तेहार’ नाम दिया गया। इस नाम को लेकर विपक्षी दल भाजपा ने आपत्ति जताई है और इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने आरोप लगाया कि यह सिर्फ शब्दों का चयन नहीं बल्कि एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में भाषा और पहचान के आधार पर ध्रुवीकरण की कोशिश की जा रही है।
बीजेपी के फायरब्रांड नेता गिरिराज सिंह ने कहा है कि ममता बनर्जी उर्दू में घोषणा-पत्र जारी कर सिर्फ दिखावा नहीं कर रही हैं। उनका असली एजेंडा सरिया कानून लाने और बंगाल को बांग्लादेश बनाने का है। गिरिराज ने आरोप लगाया कि बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्या को बंगाल में बसाकर वोट बैंक बढ़ाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि बंगाल का हर हिंदू अब ममता बनर्जी के चेहरे को पहचान चुका है। इस बार जियो या मरो का सवाल है। बता दें कि गिरिराज इससे पहले भी कई बार ममता पर बंगाल को मुस्लिम राज्य बनाने और घुसपैठियों को नागरिकता देने का आरोप लगा चुके हैं।
वहीं, टीएमसी का कहना है कि घोषणा-पत्र मुख्य रूप से बंगाली में है। अन्य भाषाओं में अनुवाद सिर्फ हर वर्ग तक पहुंचाने के लिए किया गया है। उर्दू को आधिकारिक भाषा का दर्जा पहले ही दिया जा चुका है। पार्टी का कहना है कि गिरिराज सिंह जैसे नेता बंगाल की सांप्रदायिक सौहार्द को तोड़ना चाहते हैं। ममता बनर्जी ने कहा कि बीजेपी बंगाल में अपना खेल नहीं चला पा रही है इसलिए ऐसे आरोप लगा रही है। उन्होंने विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया।
वहीं भाजपा इस मुद्दे को मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति से जोड़कर देख रही है। सोशल मीडिया पर भी इसको लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। जैसे-जैसे चुनाव करीब आ रहे हैं, इस तरह के मुद्दे सियासी बयानबाजी को और तेज कर रहे हैं और बंगाल की राजनीति में नया मोड़ ला रहे हैं।
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