झारखंड ट्रेजरी घोटाले पर गरमाई सियासत, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने CM को लिखा पत्र, की CBI जांच की मांग

बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन से कहा कि एक महीने से अधिक समय बीत गया लेकिन अभी तक इस घोटाले की निष्पक्ष एवं विश्वसनीय जांच के लिए आपके स्तर से कोई ठोस पहल नहीं की गई है.

May 15, 2026 - 18:19
झारखंड ट्रेजरी घोटाले पर गरमाई सियासत, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने CM को लिखा पत्र, की CBI जांच की मांग

RANCHI : बहुचर्चित ट्रेजरी घोटाला को लेकर झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है. इस मामले में नेता प्रतिपक्ष ने सीबीआई जांच की मांग की है. बाबूलाल ने पत्र के माध्यम से कहा कि सच सामने आ सके और इसमें संलिप्त दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिल सके.

आने-वाले समय में चारा घोटाले जैसी हो सकती परिस्थिति

बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन से कहा कि एक महीने से अधिक समय बीत गया लेकिन अभी तक इस घोटाले की निष्पक्ष एवं विश्वसनीय जांच के लिए आपके स्तर से कोई ठोस पहल नहीं की गई है. उन्होंने कहा कि आप अभी तक मौन साधे हुए हैं, यदि समय रहते हुए इसे गंभीरता से नहीं लिया गया तो आने-वाले समय में बिहार में हुए चारा घोटाले जैसी परिस्थिति होगी और इसकी जद में पदाधिकारियों के साथ-साथ सरकार में बैठे जिम्मेवार नेता भी गिरफ्त में आ जाएंगे.

अवैध निकासी मामले में अधिक घोटाले की संभावना

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं प्रतीत होता बल्कि यह एक व्यापक और संगठित भ्रष्टाचार का ज्वलंत उदाहरण है. अब तक उपलब्ध सूचनाओं एवं विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार लगभग 14 जिलों में यथा हजारीबाग, बोकारो, पलामू, गढ़वा, रांची, गुमला, देवघर, जमशेदपुर, साहिबगंज एवं अन्य ट्रेजरी घोटाले की पुष्टि हुई है. उक्त जिलों के 14 कोषागारों से लगभग 130 करोड़ रुपये की अवैध निकासी के मामले सामने आए हैं.

प्रतिदिन विभिन्न ट्रेजरी से अवैध निकासी से आ रहे मामले

उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह करते हुए कहा कि जिस गति से प्रतिदिन विभिन्न ट्रेजरी से अवैध निकासी के मामले आ रहे हैं, इससे स्पष्ट होता है कि यह घोटाला कहीं अधिक हो सकता है. इस संदर्भ में आपका ध्यान पुनः निम्नलिखित बिंदुओं की ओर आकृष्ट कराना चाहूंगा.

विश्वसनीय एजेंसी द्वारा जांच कराने का आग्रह

ऐसी परिस्थिति में जांच की निष्पक्षता, पारदर्शिता और जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि यह पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र और विश्वसनीय एजेंसी द्वारा कराई जाए.

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