पश्चिम बंगाल में पहली बार बीजेपी की सरकार, 5 मंत्रियों के साथ शुभेंदु अधिकारी ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ
शुभेंदु अधिकारी के साथ खड़गपुर सदर विधानसभा सीट से निर्वाचित हुए भाजपा के फायरब्रांड नेता दिलीप घोष, आसनसोल दक्षिण की विधायक अग्निमित्रा पॉल, मतुआ समाज के अशोक किर्तनिया, आदिवासी समाज से खुदीराम टुडू और राजवंशी समुदाय से आने वाले नीशिथ प्रमाणिक ने मंत्री के रूप में शपथ ली।
NEWS DESK : पश्चिम बंगाल में नई सरकार ने शपथ ले ली है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और 5 अन्य विधायकों ने शपथ ली। कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित भव्य समारोह में जिन लोगों को शपथ दिलायी गयी, उनमें महिला, आदिवासी और मतुआ समुदाय के लोग हैं लेकिन कोई मुस्लिम नहीं है। पश्चिम बंगाल के इतिहास में यह पहला मौका है, जब सरकार में कोई मुस्लिम मंत्री नहीं बना है।
शुभेंदु अधिकारी के साथ खड़गपुर सदर विधानसभा सीट से निर्वाचित हुए भाजपा के फायरब्रांड नेता दिलीप घोष, आसनसोल दक्षिण की विधायक अग्निमित्रा पॉल, मतुआ समाज के अशोक किर्तनिया, आदिवासी समाज से खुदीराम टुडू और राजवंशी समुदाय से आने वाले नीशिथ प्रमाणिक ने मंत्री के रूप में शपथ ली।
207 सीटें जीतकर सत्ता में आयी भाजपा
गौरतलब है कि बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में चुनाव हुए थे। 4 मई को जब नतीजे आए तो भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस की 15 साल पुरानी सरकार को सत्ता से बेदखल कर दिया। ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी 80 सीटों पर सिमट गयी। भाजपा ने पहली बार 207 सीटें जीतकर दो तिहाई बहुमत के साथ सरकार का गठन किया है।
शुभेंदु की सियासी यात्रा
शुभेंदु अधिकारी की राजनीतिक यात्रा काफी दिलचस्प रही है। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस कार्यकर्ता के रूप में की थी। बाद में वह तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए और पार्टी के प्रमुख नेताओं में गिने जाने लगे। ग्रामीण बंगाल में तृणमूल के विस्तार में उनकी अहम भूमिका मानी जाती थी।
हालांकि, वर्ष 2020 में ममता बनर्जी से मतभेद के बाद उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया। इसके बाद वह बंगाल भाजपा का सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरे। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम सीट से ममता बनर्जी को हराकर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी थीं।
जिले से उभरकर सीएम बनने वाले पहले नेता
पूर्व मेदिनीपुर जिले से आने वाले शुभेंदु अधिकारी पिछले पांच दशकों में बंगाल के पहले ऐसे मुख्यमंत्री बने हैं, जो कोलकाता के पारंपरिक राजनीतिक केंद्र से नहीं, बल्कि किसी जिले से उभरकर सामने आए हैं। इससे पहले 1970 में अजय मुखर्जी ग्रामीण पृष्ठभूमि से मुख्यमंत्री बने थे।
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