एक करोड़ का इनामी माओवादी नेता ‘किशन दा’ का निधन, बिहार-झारखण्ड समेत कई राज्यों में था आतंक, 200 से अधिक नक्सली वारदातों का था मास्टरमाइंड
लगभग चार दशकों तक सक्रिय रहे प्रशांत बोस को संगठन का ‘थिंक टैंक’ माना जाता था। गिरफ्तारी के बाद वह जेल में बंद रहा और उम्र से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहा था। उसकी उम्र 75 वर्ष के आसपास बताई जाती है।
RANCHI : प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा (माओवादी) के शीर्ष नेता और पोलित ब्यूरो सदस्य प्रशांत बोस उर्फ 'किशन दा' का निधन हो गया है। वे 75 साल के थे और उन्होंने आखिरी सांस रांची के राजेन्द्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में ली।
एक करोड़ के इनामी माओवादी नेता ‘किशन दा’ का निधन
बताया जा रहा है कि अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें आनन-फानन में जेल से सीधे रिम्स लाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। फिलहाल जेल और अस्पताल प्रशासन ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मजिस्ट्रेट की नियुक्ति की है।
प्रशांत बोस मूल रूप से पश्चिम बंगाल के रहने वाले थे। प्रशांत बोस को माओवादी संगठन में महासचिव नंबला केशव राव के बाद दूसरा सबसे प्रभावशाली नेता माना जाता था। वे संगठन की केंद्रीय समिति और पोलित ब्यूरो के सदस्य रहे और ‘ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो’ के सचिव भी थे। संगठन के भीतर उसे ‘किशन दा’, ‘मनीष’ और ‘बूढ़ा’ के नाम से जाना जाता था। उसका नाम रणनीतिक फैसलों और संगठन की दिशा तय करने में अहम भूमिका के लिए जाना जाता था।
साल 2021 में किया गया था गिरफ्तार
प्रशांत बोस को 12 नवंबर 2021 को सरायकेला-खरसावां जिले के कांड्रा टोल ब्रिज के पास पत्नी शीला मरांडी के साथ गिरफ्तार किया गया था। उस समय उनके खिलाफ एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार वह झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में 200 से अधिक नक्सली वारदातों का मास्टरमाइंड था। उसके नेतृत्व में कई बड़े हमले और संगठनात्मक निर्णय लिए गए, जो नक्सली गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण माने जाते थे।
लगभग चार दशकों तक सक्रिय रहे प्रशांत बोस को संगठन का ‘थिंक टैंक’ माना जाता था। गिरफ्तारी के बाद वह जेल में बंद रहा और उम्र से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहा था। उसकी उम्र 75 वर्ष के आसपास बताई जाती है।
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