महिला आरक्षण बिल पर सियासी घमासान जारी, कल्पना सोरेन ने भी उठाया बड़ा सवाल, जानिए क्या कहा?
33 फ़ीसदी पर भी सवाल उठाते हुए कल्पना सोरेन ने कहा कि जब हम आधी आबादी हैं तो रिजर्वेशन 50% होना चाहिए। झारखंड नहीं देश के हर राज्यों को पता है कि इनकी मंशा क्या थी।
RANCHI : केंद्र की मोदी सरकार की तरफ से प्रस्तावित महिला आरक्षण कानून में संशोधन का विधेयक संविधान (131वां संशोधन) 2026 शुक्रवार (17 अप्रैल) को लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में विफल रहा। इस मामले पर भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष को महिला विरोधी करार देते हुए कटघरे में खड़ा कर दिया है तो दूसरी तरफ इंडी गठबंधन केन्द्र की मंशा पर सवाल उठा रहा है।
इस पूरे मसले पर गांडेय विधायक कल्पना सोरेन ने कहा कि यह पक्ष और विपक्ष दोनों को पता था कि बिल में क्या होने वाला था और यह जो बिल है, वो 2023 में ही पास हो चुका था। उस बिल में जो भी शर्त थी कि पहले जनगणना कराइए, फिर परिसीमन और फिर आरक्षण क्योंकि केंद्र सरकार ने एक सिक्वेंस की बात कही थी लेकिन चुनाव के बीच में अचानक तीन दिनों का विशेष सत्र बुलाना सही नहीं था।
कल्पना सोरेन ने कहा कि अगर इसमें डिस्कशन करना था तो चुनाव से पहले होना चाहिए या फिर चुनाव के बाद। कल्पना सोरेन ने ये कहा कि इसमें मंशा किसकी क्या है, यह सबको पता है जबकि केंद्र सरकार बिल के बहाने क्या करना चाह रही थी, यह किसी से छुपा नहीं है।
वहीं, 33 फ़ीसदी पर भी सवाल उठाते हुए कल्पना सोरेन ने कहा कि जब हम आधी आबादी हैं तो रिजर्वेशन 50% होना चाहिए। झारखंड नहीं देश के हर राज्यों को पता है कि इनकी मंशा क्या थी।
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