आशा भोंसले का निधन भारतीय संगीत जगत के एक युग का अंत : रेखा सहाय
भारतीय संगीत जगत की दिग्गज पार्श्व गायिका आशा भोसले अपने लगभग छह-सात दशकों के कैरियर के दौरान एक से बढ़कर एक यादगार गाने दिए।
भारतीय संगीत जगत की महान हस्ती पद्मविभूषण स्वर कोकिला आशा भोसले के निधन से भारतीय संगीत जगत को गहरा आघात लगा है। सुरों की मल्लिका आशा भोसले के अकस्मात गुजर जाने से संगीत जगत में शून्यता आ गई है, जिसकी भरपाई निकट भविष्य में संभव नहीं है।
उक्त बातें प्रख्यात टीवी कलाकार रेखा सहाय ने कही। श्रीमती सहाय ने कहा कि अकस्मात उनके निधन की खबर ने स्तब्ध कर दिया।
भारतीय संगीत जगत की दिग्गज पार्श्व गायिका आशा भोसले अपने लगभग छह-सात दशकों के कैरियर के दौरान एक से बढ़कर एक यादगार गाने दिए। उन्होंने कई दिग्गज संगीतकारों के साथ भी काम किया। उनकी बहुमुखी प्रतिभा भारतीय संगीत जगत में स्वर्णाक्षरों में अंकित है। अपने कैरियर के दौरान लगभग 12हजार से अधिक गीतों को आवाज देने वाली आशा भोसले ने 20 से भी अधिक भाषाओं में गाने गाकर संगीत की दुनिया में एक अनोखा मुकाम हासिल किया। उनकी संगीत यात्रा ने दशकों तक भारतीय सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध किया। श्रीमती सहाय ने कहा कि मुंबई में कई कार्यक्रमों में आशा भोसले (आशा ताई) के साथ मंच साझा करने का उन्हें भी सौभाग्य प्राप्त हुआ। मृदुभाषी स्व.भोसले के साथ हुई मुलाकात अविस्मरणीय हैं। संगीत जगत में उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायक है।
उन्होंने बताया कि आशा ताई जी की खासियत थी कि उन्होंने स्वयं को सिर्फ एक दायरे तक ही सीमित नहीं रहने दिया। भजनों की गंगा बहाई, तो गजल गायकी में भी विशिष्ट पहचान बनाई। यही नहीं, कव्वाली, पॉप-रॉक संगीत, शास्त्रीय संगीत सहित संगीत की हर विधा में अपनी अमिट छाप छोड़ी। उन्होंने हिंदी के अलावा बंगाली, गुजराती, मराठी, पंजाबी, तमिल, मलयालम, यहां तक कि अंग्रेजी और रूसी भाषा में भी अपनी आवाज का जादू बिखेरा। इन्हीं विशेषताओं की वजह से दुनिया में सबसे अधिक गाने रिकॉर्ड करने के लिए गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में उनका नाम दर्ज है। भारतीय सिनेमा में उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें अनगिनत पुरस्कारों से नवाजा गया है। उन्हें दो बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्राप्त हुए। फिल्म फेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित हुईं। भारत सरकार द्वारा वर्ष 2008 में उन्हें पद्म विभूषण की उपाधि से नवाजा गया। इसके पूर्व वर्ष 2000 में फिल्म जगत का सर्वोच्च सम्मान दादा साहब फाल्के पुरस्कार से भी वह सम्मानित की गईं।
श्रीमती सहाय ने दिवंगत आत्मा की शांति और दुख की इस बेला में उनके परिवार, प्रशंसकों, संगीत प्रेमियों को संबल प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की।
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