एसएसबी में महिलाओं ने खेली सिंदूर की होली, बंगाली रीति-रिवाज के साथ मां दुर्गा को दी विदाई

Oct 25, 2023 - 07:03
एसएसबी में महिलाओं ने खेली सिंदूर की होली, बंगाली रीति-रिवाज के साथ मां दुर्गा को दी विदाई

गया । बोधगया धनावां स्थित 29वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल मुख्यालय में बड़े ही धूमधाम के साथ मां दुर्गा की पूजा अर्चना की गई।इस मौके पर सशस्त्र सीमा बल के डीआईजी छेरिंग दोरजे, कमांडेंट एचके गुप्ता, सहित अधिकारियों जवानों एवं उनके परिजनों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।अपने पुराने परंपरागत रीति रिवाज को आज भी कायम रखे हुए नवरात्र के मौके पर मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करते हैं। विजयादशमी के दिन खोईंचा देकर मां को यहां से विदा की जाती है। आज विजयादशमी के दिन मां की विदाई के समय महिलाओं के द्वारा सिंदूर होली कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मां की आरती करने के बाद महिलाओं ने सिंदूर की होली खेली है। महिलाएं अपने सुहाग की रक्षा के लिए मां के साथ-साथ आपस में महिलाएं सिंदूर की होली खेली है। यह परंपरा 29 वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल मुख्यालय में मंगलवार को देखने को मिली। साथ ही हाथ जोड़कर मां से अपने सुहाग की रक्षा करने की प्रार्थना भी करते देखी गई।इस मौके पर 29 वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल के कमांडेंट हरे कृष्ण गुप्ता ने बताया कि इस तरह का कार्यक्रम द्वितीय वर्ष 29वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल मुख्यालय में किया गया है और यह कार्यक्रम को लेकर सेक्टर एवं वाहिनी के लोगों में काफी उत्साह देखा गया है उन्होंने बताया कि आज महिलाओं के द्वारा सिंदूर की होली भी खेली गई है।विसर्जन से पहले पंडालों में सिंदूर खेला के दौरान पूरा माहौल सिंदूरमयी हो गया। मान्यता है कि ऐसा करने से पति की उम्र लंबी होती है। मां दुर्गा को पान के पत्ते में सिंदूर लगाने के बाद मिठाई खिलाते समय श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गई। धुनुची नृत्य का आयोजन किया गया।

क्या है धुनुची नृत्य का महत्व
दुर्गा पूजा के दौरान इस नृत्य की परंपरा आज से नहीं, बल्कि काफी पहले से चली आ रही है। माना जाता है कि धुनुची डांस असल में शक्ति का परिचायक है और इसका संबंध महिषासुर के वध से भी जुड़ा हुआ है। पुराणों में जिक्र है कि अति बलशाली महिषासुर का वध करने के लिए देवताओं ने मां दुर्गा की पूजा- उपासना की थी और मां ने महिषासुर के वध से पहले अपनी शक्ति को बढ़ाने के लिए यही धुनुची नृत्य किया था। तब से लेकर आज तक यह परंपरा जारी है।इस मौके पर सशस्त्र सीमा बल के डीआईजी छेरिंग दोरजी, कमांडेंट एचके गुप्ता, संजना गुप्ता,डिप्टी कमांडेंट रविशंकर , कुमारी भारती,डिप्टी कमांडेंट दूर्गा प्रसाद यादव, डिप्टी कमांडेंट वेंकट रमण, सहायक कमांडेंट राजाराम , सहायक कमांडेंट राजकुमार ,एडम अधिकारी राजीव रंजन तिवारी, सहित अधिकारी जवान व उनके परिजन मौजूद थे।

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